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अब किस उम्मीद से मैं आवाज़ दूँ तुझे
मेरी कोई बात तुझ तलक जाती नहीं ।१।
ज़माना हो गया है आए हिचकी मुझे
लगता है याद मेरी अब तुझे आती नहीं ।२।
शायद मिल जाती तू मुझे सपनों में कभी
क्या करूँ कमबख़्त नींद ही आती नहीं ।३।
एक आइना था घर में मुझे चाहने वाला
अब उसे भी यह सूरत मेरी भाती नहीं।४।
काश कोई बतला देता मुझे पहले अमित
इश्क़ है ऐसी बीमारी जो कभी जाती नहीं।५।
In response to:Reena’s Exploration Challenge #Week 60

बेह्तरीन
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Thanks!
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