हाशिया हूँ मैं

A brilliant poem by Amit Agrawal – English translation in Comments.

hecblogger's avatarPlaying with words

बहता हुआ दरिया हूँ मैं
खुद प्यासा रहता हूँ मगर
तृप्ति का ज़रिया हूँ मैं

उड़ती हुई चिड़िया हूँ मैं
सारा आसमां है ज़द में मेरे
गुलशन की प्रिया हूँ मैं

जलता हुआ दिया हूँ मैं
अंधकार मुझमें पर औरों को
भानु रवि आदित्य हूँ मैं

अज़ब एक प्रक्रिया हूँ मैं
अमित हैं क्षमताएँ मेरी पर
कहानी नहीं हाशिया हूँ मैं

In response to:Reena’s Exploration Challenge #Week 55

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2 thoughts on “हाशिया हूँ मैं

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