दस्तक

hecblogger's avatarPlaying with words

नई उम्मीद नए हौंसलों ने दस्तक दी है
आज फ़िर नए एक साल ने दस्तक दी है

कहती है मुझसे कदम मिला कर चल
समय की नई एक चाल ने दस्तक दी है

रोकते हैं मुझे पुरज़ोश तमाम ग़म पुराने
पुराने फ़िर एक मलाल ने दस्तक दी है

क्या है अनखुले दरवाज़े की दूसरी तरफ
हिम्मत कर एक सवाल ने दस्तक दी है

नहीं तोड़ेंगें इस बार तेरा ऐतबार “अमित”
फ़िर उम्मीद-ए-विसाल ने दस्तक दी है

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