नई उम्मीद नए हौंसलों ने दस्तक दी है
आज फ़िर नए एक साल ने दस्तक दी है
कहती है मुझसे कदम मिला कर चल
समय की नई एक चाल ने दस्तक दी है
रोकते हैं मुझे पुरज़ोश तमाम ग़म पुराने
पुराने फ़िर एक मलाल ने दस्तक दी है
क्या है अनखुले दरवाज़े की दूसरी तरफ
हिम्मत कर एक सवाल ने दस्तक दी है
नहीं तोड़ेंगें इस बार तेरा ऐतबार “अमित”
फ़िर उम्मीद-ए-विसाल ने दस्तक दी है
