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PROMPT #172
The theme is
Components of Time
मैं बैठी बीती यादें लेकर
समय उड़ गया पंख पसार
मैं ही पीछे रह गयी
आगे बढ़ गया सब संसार
समय सिखा देगा सब कुछ
इसी भरम में समय गंवाया
आँख कान सब बंद पड़े थे
समय तो था हरदम तैयार
आगे कल और पीछे कल की
बड़ी है भूल भुलैय्या
जो इसमें फँस गया न उबरे
वर्तमान को ही दे बिसार
समय हँसे
जो समय न चेते
उसका जीना है बेकार
