आशा की किरन

A ray of hope … by hecblogger

English version in Comments

hecblogger's avatarPlaying with words

छटी नहीं है ग़म की काली घटा अभी
पर दिखती है आशा की किरन मुझे

कितनी गहरी होगी सोचो प्यास मेरी
लगता है दरया एक कतरा शबनम मुझे

सुनते है भर देता है वक़्त हर घाव
कैसी है यह फिर सीने में चुभन मुझे

किसको फुर्सत सुनता कोई नग़मा मेरा
हर शख़्स मिला अपने में मगन मुझे

नहीं रही मेरी पहले सी सूरत “अमित”
मत दिखलाओ अब कोई दर्पन मुझे

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 170

View original post

Leave a comment