English translation in Comments…
भाने लगे हैं ये बंधन मुझे
अपनी ज़ुल्फ़ों से रिहाई न दो
प्यास ही देती है तृप्ति मुझे
छीन लो प्याला, सुराही न दो
सच मान चुका हूँ बहाने तेरे
छोड़ दो अब कोई सफ़ाई न दो
ठुकरा चुकी हो खुद जिसे तुम
अब उस रिश्ते की दुहाई न दो
न आगे बढ़ा यह फ़साना अमित
कलम तोड़ दो, रोशनाई न दो
In response to: Reena’s Exploration Challenge # 140
