English version in Comments….
फ़िर आज किसी ने दी सदा मुझे
क्यों हुआ मुझे गुमान वो तुम हो
बदली से निकला है चाँद सुहाना
कहता है ये आसमान वो तुम हो
माँगता हूँ हज़ार मन्नतें रोज़ाना
पर है एक ही अरमान वो तुम हो
कहाँ जाकर ढूँढूं तुम्हें जहाँ में
मेरे ख्यालों में ग़ुमनाम वो तुम हो
क्यों कर रहे हो कोई उम्मीद अमित
उसकी गली में बदनाम, वो तुम हो
In response to: Reena’s Exploration Challenge # 135
