रात पुरानी

Raat purani …by hecblogger

hecblogger's avatarPlaying with words

निखरा था छत पर चाँद नूरानी
आयी है याद फ़िर रात पुरानी ।१।

बिन सुलाए मुझे खुद सो गयी है
मेरे तकिये पर रात पुरानी ।२।

है क्या कोई सौदागर इसका
किस मोल बिकेगी रात पुरानी ।३।

बढ़ता जाता है ख़ुमार उतना ही
जितनी होती है रात पुरानी ।४।

क्यों नहीं भूल जाता अमित
गयी बात हुई रात पुरानी ।५।

In response to: Reena’s Exploration Challenge # 124

View original post

Leave a comment