English translation in Comments section…
अजीब होते हैं सपने
समाने को समा जाएँ आशियाँ
हाथों की चाँद लकीरों में
फिसलें तो निकल जाएँ
अंजुली से पानी की तरह
करीब होते हैं अपने
तो लगता है शबनम का क़तरा
किसी दरिया की तरह
गर रूठ जाएँ तो सागर
लगे जैसे मृगतृष्णा
In response to: Reena’s Exploration Challenge # 109
