मैं व्यस्त तो नही, पर व्यस्तता का लबादा ओढ़ लेता हूँ,
दोस्तों से मिलने की चाहत को अकसर मैं छोड़ देता हूँ
तुम से बातें करना मैं दिल से चाहता हूँ
पर क्या करूँ, मन को मैं बस यूँही मसोस लेता हूँ।
यह नही कि मेरे पास वक्त नही है
न ही बात न करने की कोई वजह है
बस अपनी असलियत जाहिर होने से डरता हूँ
मैं चुपचाप तन्हाई से खुद को जोड़ लेता हूँ।
कहते हैं, यह साथ पल दो पल का है
जिंदगी का भरोसा न आज, न कल का है
मैं फिर भी कल के इंतजार में ही रहता हूँ
मैं न जाने क्यों आज को कल पर छोड़ देता हूँ।
अगर कल न आया, तो न जाने क्या हो
जो बात कहनी थी, वो न कह पाया, तो क्या हो
इसलिए आज मैं यह इकरार करता हूँ
मैं आज अपनी यह चुप्पी तोड़ लेता हूँ।
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