Amit Agrawal’s second take on Exploration Challenge #87. English translation in Comments section….
आप यूँ ही हमें टहलाते रहें
हम हवाई किले बनाते रहें ।१।
हम दास्तान-ए-इश्क़ सुनाते रहें
आप नादानी पे मुस्कुराते रहें ।२।
आप बेरुख़ी से पेश आते रहें
हम शमा-ए-उम्मीद जलाते रहें ।३।
हाँ जब भी ज़रुरत पड़े हमारी
आप हमको दोस्त बताते रहें ।४।
न कम हो दीवानगी अमित
आप यूँ ही हमें लुभाते रहें।५।
In response to: Reena’s Exploration Challenge # 87
