Haiku translation of Amit Agrawal (hecblogger)’s Hindi poem – in Comments section
कुछ और तो मेरे पास नहीं
बस ज़ख्म हैं तेरे दिए हुए
वो क्यों न मुझे अज़ीज़ हों ।१।
मांगता है तू माफ़ी मुझसे
कैसे करूँ ऐतबार तेरा
कुछ लहज़े में तो तमीज़ हो ।२।
न रख मुझसे कोई गिला
वो क्या देगा शिफ़ा तुझे
जो ख़ुद ही तेरा मरीज़ हो ।३।
बस मुझे ही नहीं इज़ाज़त
यूँ दुत्कारता है मुझे अमित
गोया कोई नाचीज़ हो ।४।
In response to: Reena’s Exploration Challenge # 80
