दिलाते हैं याद तेरी
देते हैं पहचान मुझे
तो दाग अच्छे हैं ।१।
रातों के रंगीं सपने
या दिन के अँधेरे
कौन से रंग सच्चे हैं ।२।
हसरत ही रही हमारी
चूमते गर्दन को तेरी
ये लापरवाह लच्छे हैं।३।
हो गए जुदा हम
तो क्या प्रेम के
धागे कच्चे हैं ।४।
नहीं तुझ सी महारत
इस खेल में अमित
अभी हम बच्चे हैं ।५।
In response to: Reena’s Exploration Challenge # 80
