अब आज़ाद हूँ मैं

hecblogger's avatarPlaying with words

अब ख्वाब तेरे रातों को सताते नहीं
अब रात भर कोई ख्वाब आते नहीं

अब किस बात का बुरा मानूं मैं
अब दोस्त तेरे नाम से चिढ़ाते नहीं

अब वक़्त ही वक़्त तो है पास मेरे
अब मुझसे मिलने तुम तो आते नहीं

अब जहाँ चाहूँ खर्च करूँ पैसे अपने
अब अपना हक़ कोई दिखलाते नहीं

अब मिटा दिए हैं सारे हर्फ़ अमित
अब सितारे कोई नाम लिखवाते नहीं

In response to:Reena’s Exploration Challenge #Week 50

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