अनबुझी आग

Read the comments for a translation. Lovely piece full of longing…

hecblogger's avatarPlaying with words

समंदर है तत्पर मगर
कैसी है यह आग जो बुझती ही नहीं ।१।

ताकता हूँ शीशा मगर
कैसी है यह सूरत जो दिखती ही नहीं ।२।

बनाये कितने पुल मगर
कैसी हैं दूरियां जो मिटती ही नहीं ।३।

कोई वादा नहीं मगर
कैसी है यह आस जो घटती ही नहीं ।४।

मेरे भी थे वो कभी
कैसी है किस्मत जो टिकती ही नहीं ।५।

In response to:Reena’s Exploration Challenge #Week 45

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