कब्र के पास

hecblogger's avatarPlaying with words

इश्क़ का मैंने ज़हर पिया था
दवा नहीं थी किसी के पास।

हिज्र में बीती सारी रातें
समय नहीं था तेरे पास।

तेरी यादें भी दफना दी
मैंने अपनी कब्र के पास।

In response to:Reena’s Exploration Challenge #Week 43

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